ओंकारेश्वर में एकता न्यास का विवादित आयोजन: कन्याओं को भूखा लौटाया, यातायात जवान से अभद्रता पर बवाल
ओंकारेश्वर में मौनी अमावस्या पर एकता न्यास के आयोजन में गंभीर लापरवाही, कन्याओं को बिना भोजन रवाना किया गया, यातायात जवान से अभद्रता, जांच की मांग। ओंकारेश्वर में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य एकता न्यास और संस्कृति विभाग के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम अब गंभीर विवादों में घिर गया है। कार्यक्रम में कन्याओं को बिना भोजन रवाना करने, प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी और यातायात पुलिस के जवान से अभद्र व्यवहार जैसे आरोपों ने आयोजन की मंशा और व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
ओंकारेश्वर। मौनी अमावस्या जैसे पवित्र पर्व पर ओंकारेश्वर में संस्कृति और सनातन के नाम पर आयोजित कार्यक्रम अब घोर अव्यवस्था, अमानवीयता और अफसरशाही की मनमानी का प्रतीक बनता जा रहा है। शंकराचार्य एकता न्यास एवं संस्कृति विभाग के संरक्षण में चिन्मयानंद मिशन से जुड़े कार्यक्रम को लेकर अत्यंत गंभीर और शर्मनाक आरोप सामने आए हैं।

अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप ठाकुर ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को भीड़भाड़ वाला और सफल दिखाने के लिए आश्रम की लगभग 50 छात्राओं को 5 किलोमीटर दूर से बुलाया गया, लेकिन मौके पर उनके भोजन तक की कोई व्यवस्था नहीं थी। कन्याओं को परम शक्ति पीठ साध्वी ऋतंभरा आश्रम से भोजन व अन्य व्यवस्थाओं का झूठा आश्वासन देकर बुलाया गया, जबकि कार्यक्रम स्थल पर आयोजकों ने खुद स्वीकार किया कि बच्चों के लिए कुछ भी इंतजाम नहीं है।
प्रदीप ठाकुर ने कहा कि 30 से 40 हजार रुपये के टेंट, बड़े-बड़े फ्लेक्स और दिखावटी भव्यता पर पानी की तरह पैसा बहाया गया, लेकिन कन्याओं की बुनियादी जरूरतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। यह न केवल असंवेदनशीलता है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
मामले में मार्कंडेय संन्यास आश्रम के कोठारी रमन चेतन ने भी आयोजकों की पोल खोलते हुए साफ कहा कि उन्हें बच्चों के भोजन को लेकर कोई पूर्व सूचना ही नहीं दी गई थी।
इसी कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था की पराकाष्ठा तब सामने आई, जब भीड़ नियंत्रण और पार्किंग व्यवस्था में तैनात खंडवा यातायात पुलिस के जवान बिरजू रावत के साथ संस्कृति विभाग के ओएसडी मनीष पांडे द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। ड्यूटी निभा रहे जवान को अपमानित किया गया, जिसकी सूचना उसने तत्काल थाना प्रभारी एवं कंट्रोल रूम को दी। हालांकि बाद में आवेदन नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वर्दीधारी जवान की गरिमा इतनी सस्ती है?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और मीडिया को कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना न देना, बाहर से भीड़भाड़ में कन्याओं को बुलाना और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी—यह सब दर्शाता है कि संस्कृति विभाग और एकता न्यास के कर्ताधर्ताओं की मनमानी अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। क्षेत्र में यह सवाल भी गूंजने लगा है कि यदि कोई दुर्घटना हो जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?
अखिल भारत हिंदू महासभा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई, तो संगठन इसे उच्च स्तर तक ले जाएगा। महासभा ने स्पष्ट कहा कि धर्म और संस्कृति के नाम पर बच्चों, जवानों और आमजन के सम्मान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।